वायरस वर्गीकरण
समुदाय:Group IV ((+)ssRNA)
जाति:ज़िका विषाणु
जिका विषाणु फ्लाविविरिडए विषाणु परिवार से है। जो दिन के समय सक्रिय रहते हैं। इन्सानों में यह मामूली बीमारी के रूप में जाना जाता है, जिसे जिका बुखार, जिका या जिका बीमारी कहते हैं। 1950 के दशक से इस बीमारी का पता चला। यह अफ्रीका से एशिया तक फैला हुआ है। यह 2014 में प्रशांत महासागर से फ्रेंच पॉलीनेशिया तक और उसके बाद 2015 में यह मेक्सिको, मध्य अमेरिका तक भी पहुँच गया।
इतिहास
वर्ष 1947 में पीले बुखार का शोध कर रहे पूर्वी अफ्रीकी विषाणु अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों को जिका के जंगल में रीसस मकाक (एक प्रकार का लंगूर) को पिंजरे में रख कर अपना शोध कर रहे थे। उस बंदर को बुखार हो जाता है। 1952 में उसके संक्रामक घटक को जिका विषाणु नाम से बताया गया। यह इसके बाद नाइजीरिया में वर्ष 1954 में एक मानव से निकाला गया था।इसके 2007 में खोज होने से पहले इससे संक्रमण के मामले अफ्रीका और दक्षिण पूर्व एशिया में बहुत कम थे।
अप्रैल 2007 में इसका प्रभाव पहली बार अफ्रीका और एशिया के बाहर देखने को मिला। यप नामक एक द्वीप में लाल चकत्ते, नेत्रश्लेष्मलाशोथ, और जोड़ों के दर्द के रूप में इसका असर दिखा, जिसे सामान्यतः डेंगू या चिकनगुनिया समझा जा रहा था। लेकिन जब बीमार लोगों के रक्त का परीक्षण किया गया तो उनके रक्त में जिका विषाणु का आरएनए पाया गया। अब तक इसके 49 मामलों की पुष्टि हो चुकी है और जबकि 59 मामले की पुष्टि नहीं हुई और किसी के भी मरने की या अस्पताल में रखने की जानकारी नहीं है।
लक्षण
दायें हाथ में लाल चकते
इस विषाणु के आम लक्षण में हल्के सिर दर्द, लाल चकते, बुखार, बेचैनी, जोड़ों में दर्द शामिल है। इसका पहला प्रलेखन 1964 में किया गया था। जिसके अनुसार यह हल्के सिर दर्द से शुरू होता है और बाद में लाल चकते, बुखार, और पीठ में दर्द के साथ यह आगे बढ़ता जाता है।
टीके का विकास
इस तरह के कई विषाणु हेतु प्रभावी टीके उपलब्ध है। डेंगू बुखार, जापानी इन्सेफेलाइटिस आदि बीमारी हेतु टीके का विकास 1930 के दशक में शुरू हुआ था। जबकि केवल डेंगू बुखार के लिए ही टीका 2010 के दशक के मध्य उपलब्ध हो पाया।
अमेरिकी महाद्वीप जिका विषाणु प्रकोप (2015-वर्तमान)
जनवरी 2016 में जिका विषाणु का आज तक का सबसे बड़े पैमाने का प्रकोप अमरीकी महाद्वीप में चल रहा है। जनवरी 2016 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अमेरिका में यह विषाणु इस वर्ष के अंत तक बहुतायत से फैल सकता है।इस विषाणु के हर पाँच में से एक मामले में यह जिका बुखार या शरीर में दाने के रूप में दिखाई देता है।
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